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Monday, 27 July 2020

raksha bandhan history in hindi

                                            raksha bandhan history in hindi

हिन्दू धर्म के अनुसार राखी का इतिहास हमें महाभारत काल के युग से ही मिलता रहा है भगवान श्रीकृष्ण को सूरतबति नाम की चची थी उसने शिशुपाल नमक एक विकृत बच्चे को जन्म दिया | बाद में उसे पता चलता है जिसके स्पर्श से स्वस्थ होगा उसी के हाथों वह मारा जायेगा एक दिन श्रीकृष्ण अपने चाची के घर आये थे और जैसे ही सुरत्वाति ने श्रीकृष्ण के हाथों में बेटे को रखा वह बच्चा सुन्दर हो गया सुरत्वाति यह बदलाव देखकर खुश हो गयी लेकिन उसकी मौत श्रीकृष्ण के हाथों होने की संभावना से वह विचलित हो गयी वह भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करने लगी भले ही शिशुपाल कोई गलती कर बैठे लेकिन उसको श्रीकृष्ण के हाथों से सजा नहीं मिलनी चाहिए तो भगवान श्रीकृष्ण ने उससे वादा किया लेकिन वह बोले अगर वह 100 से ज्यादा गलतियां करेगा तो मैं उसे जरूर सजा दूंगा शिशुपाल बड़ा होकर चेती नामक एक राज्य का राजा बन गया वो एक राजा भी था और भगवान् श्रीकृष्ण का रिश्तेदार भी था लेकिन वो बहुत ही क्रूर राजा बन गया, अपने राज्य के लोगो को बहुत सताने लगा और बार बार भगवान श्रीकृष्ण को चुनौती देने लगा, एक समय तो उसने भरी राज्यसभा में ही भगवान् श्रीकृष्ण की निंदा की और शिशुपाल उसी दिन 100 गलतियों की सीमा पर कर दी तुरंत ही भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र का शिशुपाल पर प्रयोग किया इसी तरह से बहुत चेतवानी मिलने के बाद भी शिशुपाल ने अपने गुण नहीं बदले और अंत में उसे अपनी सजा भुगतनी पड़ी, भगवान् श्रीकृष्ण जब अपनी सुदर्शन चक्र को छोड़ रहे थे तब उनकी उँगलियाँ में चोट लगी भगवान् श्रीकृष्ण के आस पास के लोग उस घाव पे बांधने के लिए इधर उधर भागने लगे लेकिन सामने कड़ी द्रौपदी कुछ सोचे समझे बिना अपनी साड़ी के कोने को फाड़कर भगवन श्रीकृष्ण के घाव पव लपेटा, भगवान् श्रीकृष्ण ने बोलै शुक्रिया प्यारी बहना, तुमने मेरे कष्ट  में साथ दिया है तो मैं भी तुम्हारे कष्ट में मदद करने का वडा करता हु यह कहके भगवान् श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को रक्षा करने का अस्श्वाशन दिया  और इस घटना से रक्षा बंधन का शुरुआत हुआ बाद में जब कौरव ने पूरी राज्यसभा में सबके सामने द्रौपदी का साड़ी खींचकर जब उसका अपमान करने का प्रयास किया तो भगवान् श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को बचाकर अपना वादा पूरा किया उस समय से बहने अपने भाई को राखी बांध रही है और भाई अपनी बहन को जीवन भर रक्षा करने का आश्वाशन देता रहा है | 
यह त्यौहार सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | 

दूसरा इतिहास कर्णावती और उसके हुमायूँ से जुड़ा जुआ है जिसमे कर्णावती जो चित्तोड़ की रानी रहती है और जो राणा सांगा की पत्नी रहती है | राणा सांगा कशहीद  हो जाते  है बाबर से लड़ाई करने में तबसे कर्णावती चित्तौड़ का कार्यभार संभालती है लेकिन गुजरात का बहादुर शाह जो चित्तौड़ पर कब्ज़ा करने के इरादे से आक्रमण करता है तब कर्णावती मदद के लिए हुमायूँ को राखी भेजती है और मदद को बोलती है तब हुमायूँ अपनी सेना को भेजता है चित्तौड़ कि रक्षा करने के लिए | यह इतिहास राखी का महत्व बताती है | 

Mantra for Raksha bandhan:-
ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

Raksha bandhan date-( Raksha bandhan date 2020 )
( राखी बांधने का समय )- 3 August 2020
Raksha bandhan muhurut - ( राखी बांधने का समय ):- 
Rakhi bandhane ka muhurt ( राखी बांधने का मुहूर्त )  - 09:27:30 AM to 21:11:21 PM
Rakhi bandhane ka aparahan muhurt (राखी बांधने का अपराह्न मुहूर्त )  - 13:45:16 PM to 16:23:16 PM
Rakhi bandhane ka pradosh muhurt (राखी बांधने का प्रदोष मुहूर्त ) - 19:01:15 PM to 21:11:21 PM
Muhurt Time ( मुहूर्त का समय ) - 11 hrs 41 minute 





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